Friday, 26 November 2021

मिक्की माउस




मिक्की माउस, 
मिक्की माउस 
कहाँ तुम्हारा हाउस, 
बोलो कहाँ तुम्हारा हाउस।

क्या खाते हो क्या पीते हो, 
बोलो कहाँ से आते हो, 
बिल्ली को तुम नाच नचाते, 
फिर कैसे छुप जाते हो। 
 
कार्टून की दुनिया से, 
एक दिन बाहर आओगे क्या,
लुक्का छुप्पी भागा दौड़ी,
मेरे संग भी खेलोगे क्या। 

मै भागूंगी तुमसे बेहतर, 
कभी पकड़ ना पाओगे,
दिन में तारे दिख जायेंगे, 
ऐसा चक्कर खाओगे। 

फिर तुमको जलपान कराकर, 
मै यह तुमसे पूछूँगी,
मिक्की माउस मिक्की माउस, 
कहाँ तुम्हारा हाउस,
बोलो कहाँ तुम्हारा हाउस।
 

रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

Thursday, 11 November 2021

हे मेरे ईश्वर 🙏


खूबसूरत है वो जिह्वा जो,
केवल ईश्वर के नाम की गुणगान करती है !!

खूबसूरत है वो हृदय जो,
केवल ईश्वर के लिये धड़कता है !!

खूबसूरत है वो भाव जो, ईश्वर की,
सोहबत की भावनाओं को समझ जाए !!

खूबसूरत है वो एहसास जिस मे,
ईश्वर प्रेम की मधुर मिठास हो जाए !!

खूबसूरत है वो बाते,
जिनमे ईश्वर की बाते शमिल हो !!

खूबसूरत है वो नैन जिनमे,
ईश्वर के दर्शन की प्यास है !!

खूबसूरत है वो हाथ जो,
नित ईश्वर की सेवा में लगे रहते है !!

खूबसूरत है वो सोच,
जिसमे केवल ईश्वर की ही सोच हो !!

खूबसूरत है वो पैर जो,
सुबह शाम ईश्वर की तरफ बढ़ते है !!

खूबसूरत है वो अश्रु जो,
ईश्वर की एक झलक पाने को बेताब है !!

खूबसुरत है वो कान जो,
ईश्वर नाम का सुमिरन सुनते है !!

खूबसुरत है वो शीश जो,
ईश्वर के चरणों में नमन को झुकता है !!

 

रचना - (अभय तिवारी) ✍️ 

माँ

हमने सभी रिश्तो में मिलावट देखा,  हमने कच्चे रंग का सजावट देखा। लेकिन सालों साल से देखा है मैंने माँ को, ना चेहरे पर कभी उसके थकावट को देखा,...