एक अकेला बूँद हूँ,
मिल जाऊँ तो दरिया हूँ।एक अकेला वृक्ष हूँ,
मिल जाऊँ तो उपवन हूँ।
एक अकेला पत्थर हूँ,
मिल जाऊँ तो पर्वत हूँ।
एक अकेला तिनका हूँ,
मिल जाऊँ तो घोसला हूँ।
एक अकेला धागा हूँ,
मिल जाऊँ तो चादर हूँ।
एक अकेला कागज हूँ,
मिल जाऊँ तो किताब हूँ।
एक अकेला अलफ़ाज़ हूँ,
मिल जाऊँ तो सुंदर रचना हूँ।
एक अकेला मैं ईंट पत्थर हूँ,
मिल जाऊँ तो इमारत हूँ।
एक अकेला मैं दुआ हूँ,
मिल जाऊँ तो इबादत हूँ।
रचना - (अभय तिवारी) ✍️