Friday, 24 December 2021

मै एक अकेला


एक अकेला बूँद हूँ,
मिल जाऊँ तो दरिया हूँ।
एक अकेला वृक्ष हूँ,
मिल जाऊँ तो उपवन हूँ।
एक अकेला पत्थर हूँ,
मिल जाऊँ तो पर्वत हूँ।
एक अकेला तिनका हूँ,
मिल जाऊँ तो घोसला हूँ।
एक अकेला धागा हूँ,
मिल जाऊँ तो चादर हूँ।
एक अकेला कागज हूँ,
मिल जाऊँ तो किताब हूँ।
एक अकेला अलफ़ाज़ हूँ,
मिल जाऊँ तो सुंदर रचना हूँ।
एक अकेला मैं ईंट पत्थर हूँ,
मिल जाऊँ तो इमारत हूँ।
एक अकेला मैं दुआ हूँ,
मिल जाऊँ तो इबादत हूँ।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️

Monday, 6 December 2021

चरण वंदन 🙏

जो पिता का चरण वंदन करता है,
वो कभी गरीब नहीं होता।

जो मां का चरण वंदन करता है,
वो कभी बदनसीब नही होता।

जो भाई का चरण वंदन करता है,
वो कभी गमगीन नही होता।

जो बहन का चरण वंदन करता है,
वो कभी चरित्रहीन नहीं होता।

जो गुरू का चरण वंदन करता है,
उस जैसा कोई खुशनसीब नहीं होता।

जो अपने से बड़ों का चरण वंदन करता है,
उसके पुण्य में बढ़ोतरी होती है।

जो भगवान का चरण वंदन करता है,
भगवान उसका साथ कभी नहीं छोड़ता।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️ 

माँ

हमने सभी रिश्तो में मिलावट देखा,  हमने कच्चे रंग का सजावट देखा। लेकिन सालों साल से देखा है मैंने माँ को, ना चेहरे पर कभी उसके थकावट को देखा,...