Saturday, 18 September 2021

विश्व भक्ति जागृत हो...


देश प्रेम और देशभक्ति से, 

क्या हासिल कर पाए हैं हम,

 मानवता की चिता जलाकर,

 हाथ सेंकते आए हैं हम 

जन्म मिला इस वसुंधरा पर, 

छत है ये आकाश सबका, 

एक है सूरज चांद एक है, 

और ये सारा जहां सभी का 

सबको अपने स्वार्थ की ख़ातिर 

खंडित करते आए हैं हम,

 मानवता की चिता जलाकर,

 हाथ सेंकते आए हैं हम,

 क्या हो गर सरहद ना हो, 

सैनिक ना हो युद्ध भी ना हो, 

भाषा की तकरारे ना हो, 

मजहब की दिवारे ना हो 

याद करो की प्रेमशांति का, 

स्वप्न संजोते आए हैं हम, फिर भी....क्यों ?

 मानवता की चिता जलाकर, 

हाथ सेंकते आए हैं हम,



रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️
 

1 comment:

  1. वसुधैव कुटुंबकम इस कथन की सार्थकता इसी में है कि प्रत्येक मनुष्य अपने पराए का भेद त्याग कर मनुष्य के प्रति मनुष्यता का भाव रखें.

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