जा रे बहना पी के घर,
बचपन की गलियाँ छोड़कर,
मोह-माया, प्यार-ममता,
सारे बंधन तोड़कर।
ओस की बूंदो सी निर्मल,
भावनाये प्रियजनों की,
माँ की ममता स्नेह सबका,
हठखेलिया भाई-बहन की,
सब चलेंगे संग तेरे,
तेरा दामन थामकर,
जा रे बहना पी के घर,
बचपन की गलियाँ छोड़कर।
माँग ले रब से दुवाएँ,
पीहर तेरा अमर हो,
तू रहे खुशहाल हरदम,
ससुराल तेरा स्वर्ग हो,
मन तेरा मंदिर बने,
मंदिर में तेरे राम हो,
हर जनम में सात जन्मो का,
उन्ही का साथ हो।
स्वप्न भर ले नयन में तू,
सारे गम को भूलकर,
जा रे बहना पी के घर,
बचपन की गलियाँ छोड़कर।
रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️
Super....
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