Thursday, 13 January 2022

उलझन

 

अक्सर ऐसा होता है

मन, मन ही मन में रोता  है।

 

क्यों जो दिखता वो ना होता ?

और जो होता कभी ना दिखता,

भ्रमजाल है बिखरा दुनिया में,

पर कौन इसे समझता है,

मन, मन-ही-मन  में रोता  है।


कुछ खोता है, कुछ पाता है,

सब पाकर भी पछताता है,

कभी बैठ ख़ुशी  से गाता है,

और मन का चमन सजाता है,  

पर मन-ही-मन  में रोता  है।

 

मन ही मन की उलझन है,

उलझन ही मन की फितरत है,

मन को सुलझाना चाहा पर ,

ये हर पल और उलझता है,

मन, मन ही मन  में रोता  है।


रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

 

 

 

 

Sunday, 2 January 2022

जीवन की रीत


सबको हँसाते रहना तुम,       
लेकिन
कभी किसी पर हँसना मत।

सबके दुख बाॅटते रहना तुम,
लेकिन
किसी को दुख मत देना तुम।

सबकी राहों में दीप जलाते रहना तुम,
लेकिन
किसी के दिल को मत जलाना तुम।

सबके आगे आत्मसम्मान से शीश झुकाना तुम ,
लेकिन
कभी किसी को नीचा मत दिखाना तुम।

सबका करते रहना सम्मान तुम,
लेकिन
कभी किसी से ईर्ष्या, द्वेष न रखना तुम।

सदा अपने आचार-विचार को ठीक रखना तुम,
लेकिन
कभी भी बुरे व्यसनों में ना फँसना तुम।

यही है जीवन की रीत,
इसे सदा दिल मे बसाये रखना तुम।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️

Friday, 24 December 2021

मै एक अकेला


एक अकेला बूँद हूँ,
मिल जाऊँ तो दरिया हूँ।
एक अकेला वृक्ष हूँ,
मिल जाऊँ तो उपवन हूँ।
एक अकेला पत्थर हूँ,
मिल जाऊँ तो पर्वत हूँ।
एक अकेला तिनका हूँ,
मिल जाऊँ तो घोसला हूँ।
एक अकेला धागा हूँ,
मिल जाऊँ तो चादर हूँ।
एक अकेला कागज हूँ,
मिल जाऊँ तो किताब हूँ।
एक अकेला अलफ़ाज़ हूँ,
मिल जाऊँ तो सुंदर रचना हूँ।
एक अकेला मैं ईंट पत्थर हूँ,
मिल जाऊँ तो इमारत हूँ।
एक अकेला मैं दुआ हूँ,
मिल जाऊँ तो इबादत हूँ।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️

Monday, 6 December 2021

चरण वंदन 🙏

जो पिता का चरण वंदन करता है,
वो कभी गरीब नहीं होता।

जो मां का चरण वंदन करता है,
वो कभी बदनसीब नही होता।

जो भाई का चरण वंदन करता है,
वो कभी गमगीन नही होता।

जो बहन का चरण वंदन करता है,
वो कभी चरित्रहीन नहीं होता।

जो गुरू का चरण वंदन करता है,
उस जैसा कोई खुशनसीब नहीं होता।

जो अपने से बड़ों का चरण वंदन करता है,
उसके पुण्य में बढ़ोतरी होती है।

जो भगवान का चरण वंदन करता है,
भगवान उसका साथ कभी नहीं छोड़ता।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️ 

Friday, 26 November 2021

मिक्की माउस




मिक्की माउस, 
मिक्की माउस 
कहाँ तुम्हारा हाउस, 
बोलो कहाँ तुम्हारा हाउस।

क्या खाते हो क्या पीते हो, 
बोलो कहाँ से आते हो, 
बिल्ली को तुम नाच नचाते, 
फिर कैसे छुप जाते हो। 
 
कार्टून की दुनिया से, 
एक दिन बाहर आओगे क्या,
लुक्का छुप्पी भागा दौड़ी,
मेरे संग भी खेलोगे क्या। 

मै भागूंगी तुमसे बेहतर, 
कभी पकड़ ना पाओगे,
दिन में तारे दिख जायेंगे, 
ऐसा चक्कर खाओगे। 

फिर तुमको जलपान कराकर, 
मै यह तुमसे पूछूँगी,
मिक्की माउस मिक्की माउस, 
कहाँ तुम्हारा हाउस,
बोलो कहाँ तुम्हारा हाउस।
 

रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

Thursday, 11 November 2021

हे मेरे ईश्वर 🙏


खूबसूरत है वो जिह्वा जो,
केवल ईश्वर के नाम की गुणगान करती है !!

खूबसूरत है वो हृदय जो,
केवल ईश्वर के लिये धड़कता है !!

खूबसूरत है वो भाव जो, ईश्वर की,
सोहबत की भावनाओं को समझ जाए !!

खूबसूरत है वो एहसास जिस मे,
ईश्वर प्रेम की मधुर मिठास हो जाए !!

खूबसूरत है वो बाते,
जिनमे ईश्वर की बाते शमिल हो !!

खूबसूरत है वो नैन जिनमे,
ईश्वर के दर्शन की प्यास है !!

खूबसूरत है वो हाथ जो,
नित ईश्वर की सेवा में लगे रहते है !!

खूबसूरत है वो सोच,
जिसमे केवल ईश्वर की ही सोच हो !!

खूबसूरत है वो पैर जो,
सुबह शाम ईश्वर की तरफ बढ़ते है !!

खूबसूरत है वो अश्रु जो,
ईश्वर की एक झलक पाने को बेताब है !!

खूबसुरत है वो कान जो,
ईश्वर नाम का सुमिरन सुनते है !!

खूबसुरत है वो शीश जो,
ईश्वर के चरणों में नमन को झुकता है !!

 

रचना - (अभय तिवारी) ✍️ 

Thursday, 28 October 2021

आत्म ज्ञान की प्राप्ति

 


किसी शहर  में एक धनवान व्यापारी रहता था, उसके पास कोई धन और संपत्ति की कमी ना थी, बहुत बड़ी कोठी थी, नौकर भी थे, किसी तरह की कोई  कमी ना थी, लेकिन फिर भी वह हर समय परेशान रहता था।  उसकी यह परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी। ना दिन मे उसे चैन मिलता ना रात मे उसे सुकून मिलता। उसकी तबियत पहले से ज्यादा बिगड़नी शुरू हो गयी, क्या करे उसे कुछ सूझ भी नहीं रहा था एक दिन उसके किसी रिश्तेदार  उसके यहाँ मिलने आया और उससे उसकी परेशानी का कारण जानना चाहा, तब उस व्यापारी ने उसे पूरी बात बता दी।

उसके  शहर से कुछ दूर एक घने जंगल में  एक स्वामी जी अपने शिष्यों के साथ डेरा डाले हुए थे। ये बात उनके रिश्तेदार द्वारा उस व्यापारी को पता चली। उस रिश्तेदार ने उस व्यापारी से आग्रह किया कि वो उन स्वामी जी से   मिलकर अपनी समस्या का समाधान जाने। वो व्यापारी बिना विलंब किये अगले दिन स्वामी जी से मिलने पहुँचा स्वामी जी से मिलकर अपनी सारी समस्याएं बतायी और बोला प्रभु , मै अपने जिदंगी से परेशान हू मुझे दिन रात नींद नही आती, मै अवसाद ग्रस्त हो चुका हूँ और तनाव से घिरा महसूस कर रहा हूँ मुझे इस समस्या से निजात दिलाये।

स्वामी जी ने कहाघबराना नही है घबराने से बात बिगड़ती है। तुम्हारी सारी परेशानी दूर हो जायेगी। भगवान के चरणों में दीप जलाना शुरू कर दो। स्वामी जी ने उसे अंतर्मन से पुजा पाठ करने की सलाह दी, कुछ दिन पुजा पाठ करने के बाद उसका मन इससे भी हटने लगा वह जब भी पूजा करने बैठता उसका मन नही रमता और इधर उधर की बातें सोचने लगता। लगातार दिन बीतता चला गया। वो व्यापारी उस स्वामी जी से मिलने उनके पास पहुंचा और अपनी समस्या बताई, लेकिन स्वामी जी ने उसकी बाते सुनकर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और शांत रहे।

एक दिन की बात है वो व्यापारी  स्वामी जी के साथ बाते करते हुए घूम रहा था तभी अचानक उसके पैरो में एक बडे से पत्थर से ठोकर लगी और वहीं बैठ गया तथा पैरो को देखा और  पकड़कर चिल्लाने लगा - "स्वामीजी, मुझे कुछ उपाय बताये ? मुझे बहुत पीड़ा हो रही है।" तब स्वामी जी बोले - " रो क्यों रहे हो? छोटा सा पत्थर ही तो लगा है व्यापारी ने उस चोट को सहलाया और मरहम लगाया तब उसे उस पीड़ा से मुक्ति मिला।

स्वामी जी कुछ देर सोचने के बाद बोले नेहे मनुष्य तुम्हे जरा सी चोट क्या लग गयी तुम इतना गहरी वेदना में डूब गये, तुम्हें इतनी पीड़ा होने लगी की तुम बर्दाश्त नहीं कर  पाये। लेकिन जरा सोचो कि तुम अपने अंदर  कितने पत्थरों के चोट के निशान लेकर घूम रहे हो। लोभ के, मोह के, क्रोध के, ईर्ष्या के, द्वेष के, जलन के, अहंकार के। जब तक तुम उन पर मरहम लगाकर नही ठीक करोगे तब तक  तुम शांति की उम्मीद कैसे कर सकते हो ?"

स्वामी जी के इस दिव्य कथन को सुनने के बाद उसके अंदर ज्ञान की लौ प्रज्जवलित होने लगी, उसकी अंतरात्मा तृप्त हो उठी, उसके अदर ज्ञान का प्रकाश विधमान हो गया।अज्ञानता का अंधकार हमेशा के लिए दूर हो गया। उसे शांति का पथ प्रदर्शित होने लगा।

 

रचना - (अभय तिवारी) ✍️

माँ

हमने सभी रिश्तो में मिलावट देखा,  हमने कच्चे रंग का सजावट देखा। लेकिन सालों साल से देखा है मैंने माँ को, ना चेहरे पर कभी उसके थकावट को देखा,...