Friday, 24 September 2021

कृष्ण का बालरूप

मोहक रूप निहारु पल पल 
देखु तुम्हारी ओर
तुम बिन सुन्दर कुछ भी नहीं है 
क्या देखु कुछ और 
चन्दन तिलक मनमोहिनी सूरत
तोरे कंठ बैजन्ती पुष्प माल
बसों मेरे हृदय में नंदलाल
मोरपंख सर हाथ में बंशी 
नयन मीन जश  लागे 
होठ कमल सा सुन्दर शोभे 
बंशी धुन मन राजे 
नाम कन्हैया सबको भाये 
नील बदन मन मोहे 
नटखट कान्हा रास रचाये 
पूजे सब जग तोहे 


रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

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