मोहक रूप निहारु पल पल
देखु तुम्हारी ओर
तुम बिन सुन्दर कुछ भी नहीं है
क्या देखु कुछ और
चन्दन तिलक मनमोहिनी सूरत
तोरे कंठ बैजन्ती पुष्प माल
तोरे कंठ बैजन्ती पुष्प माल
बसों मेरे हृदय में नंदलाल
मोरपंख सर हाथ में बंशी
नयन मीन जश लागे
होठ कमल सा सुन्दर शोभे
बंशी धुन मन राजे
नाम कन्हैया सबको भाये
नील बदन मन मोहे
नटखट कान्हा रास रचाये
पूजे सब जग तोहे
रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️
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