Sunday, 27 March 2022

आघात

 

एक शोर हुआ, ऐसा गूँजा कि  

अन्तःकरण अशांत हुआ।

तूफ़ान उठा ऐसा जोरों का

कण-कण पल में खिन्न हुआ।

 

कुछ टूट गया, कुछ फूट गया,

कुछ रौंद गया, कुछ नष्ट हुआ।

एक आग लगी ऐसी कि

हाहाकार मचासब राख हुआ।

 

वह राख उड़ी उजले मन पर,

धुंधला सा सारा दृश्य हुआ।

फिर कुछ ना बचा चोटिल मन में

बस आह बची और दर्द हुआ।


रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

Tuesday, 1 March 2022

भोले की महिमा


हाथ में जिसके डमरू बाजे,   
गले मे लिपटे नाग, 
लीला जिसकी अपरम्पार
वो हैं भोले नाथ

एक फूल, एक पत्र बेल का, 
एक लोटा जल की धार, 
हे भोलेनाथ ! हे महादेव ! 
कर दे भक्तों का कल्याण

भोले की महिमा है अपरंपार,
सभी भक्तों का करते कल्याण, 
आओ शीश नवाये भोले के चरणों में, 
मिल कर हम बांटे भोले का प्यार अपनों मे 

चरण में रखना, शरण में रखना, 
हरदम तेरी लगन में रखना, 
सुख का उजियारा हों या दुःख का अँधेरा, 
जो भी हो भोले, मगन में ही रखना

माला ये साँसों की, सिमरन के मोती, 
मेरा मन ना भटके, शरण में रखना, 
पलकें गिराऊ जो भोले, बस तेरे ही हो दर्शन, 
हर पल मुझे बस इसी तड़पन में रखना।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️


माँ

हमने सभी रिश्तो में मिलावट देखा,  हमने कच्चे रंग का सजावट देखा। लेकिन सालों साल से देखा है मैंने माँ को, ना चेहरे पर कभी उसके थकावट को देखा,...