हाथ में जिसके डमरू बाजे,
गले मे लिपटे नाग,
लीला जिसकी अपरम्पार
वो हैं भोले नाथ।
एक फूल, एक पत्र बेल का,
एक लोटा जल की धार,
हे भोलेनाथ ! हे महादेव !
कर दे भक्तों का कल्याण।
भोले की महिमा है अपरंपार,
सभी भक्तों का करते कल्याण,
आओ शीश नवाये भोले के चरणों में,
मिल कर हम बांटे भोले का प्यार अपनों मे ।
चरण में रखना, शरण में रखना,
हरदम तेरी लगन में रखना,
सुख का उजियारा हों या दुःख का अँधेरा,
जो भी हो भोले, मगन में ही रखना।
माला ये साँसों की, सिमरन के मोती,
मेरा मन ना भटके, शरण में रखना,
पलकें गिराऊ जो भोले, बस तेरे ही हो दर्शन,
हर पल मुझे बस इसी तड़पन में रखना।
रचना - (अभय तिवारी) ✍️
Jai bholenaath
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