Wednesday, 9 February 2022

विदाई

 

जा रे बहना पी के घर,

बचपन की गलियाँ  छोड़कर,

मोह-माया, प्यार-ममता,

सारे बंधन तोड़कर।

 

ओस की बूंदो सी निर्मल,

भावनाये प्रियजनों की,

माँ की ममता स्नेह सबका,

हठखेलिया भाई-बहन की,

सब चलेंगे संग तेरे,

तेरा दामन थामकर,

जा रे बहना पी के घर,

बचपन की गलियाँ छोड़कर।

 

माँग ले रब से दुवाएँ,

पीहर तेरा अमर हो,

तू रहे खुशहाल हरदम,

ससुराल तेरा स्वर्ग हो,

मन तेरा मंदिर बने,

मंदिर में तेरे राम हो,

हर जनम में सात जन्मो का,

उन्ही का साथ हो।

 

स्वप्न भर ले नयन में तू,

सारे गम को भूलकर,

जा रे बहना पी के घर,

बचपन की गलियाँ छोड़कर।


रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

Thursday, 13 January 2022

उलझन

 

अक्सर ऐसा होता है

मन, मन ही मन में रोता  है।

 

क्यों जो दिखता वो ना होता ?

और जो होता कभी ना दिखता,

भ्रमजाल है बिखरा दुनिया में,

पर कौन इसे समझता है,

मन, मन-ही-मन  में रोता  है।


कुछ खोता है, कुछ पाता है,

सब पाकर भी पछताता है,

कभी बैठ ख़ुशी  से गाता है,

और मन का चमन सजाता है,  

पर मन-ही-मन  में रोता  है।

 

मन ही मन की उलझन है,

उलझन ही मन की फितरत है,

मन को सुलझाना चाहा पर ,

ये हर पल और उलझता है,

मन, मन ही मन  में रोता  है।


रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

 

 

 

 

Sunday, 2 January 2022

जीवन की रीत


सबको हँसाते रहना तुम,       
लेकिन
कभी किसी पर हँसना मत।

सबके दुख बाॅटते रहना तुम,
लेकिन
किसी को दुख मत देना तुम।

सबकी राहों में दीप जलाते रहना तुम,
लेकिन
किसी के दिल को मत जलाना तुम।

सबके आगे आत्मसम्मान से शीश झुकाना तुम ,
लेकिन
कभी किसी को नीचा मत दिखाना तुम।

सबका करते रहना सम्मान तुम,
लेकिन
कभी किसी से ईर्ष्या, द्वेष न रखना तुम।

सदा अपने आचार-विचार को ठीक रखना तुम,
लेकिन
कभी भी बुरे व्यसनों में ना फँसना तुम।

यही है जीवन की रीत,
इसे सदा दिल मे बसाये रखना तुम।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️

Friday, 24 December 2021

मै एक अकेला


एक अकेला बूँद हूँ,
मिल जाऊँ तो दरिया हूँ।
एक अकेला वृक्ष हूँ,
मिल जाऊँ तो उपवन हूँ।
एक अकेला पत्थर हूँ,
मिल जाऊँ तो पर्वत हूँ।
एक अकेला तिनका हूँ,
मिल जाऊँ तो घोसला हूँ।
एक अकेला धागा हूँ,
मिल जाऊँ तो चादर हूँ।
एक अकेला कागज हूँ,
मिल जाऊँ तो किताब हूँ।
एक अकेला अलफ़ाज़ हूँ,
मिल जाऊँ तो सुंदर रचना हूँ।
एक अकेला मैं ईंट पत्थर हूँ,
मिल जाऊँ तो इमारत हूँ।
एक अकेला मैं दुआ हूँ,
मिल जाऊँ तो इबादत हूँ।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️

Monday, 6 December 2021

चरण वंदन 🙏

जो पिता का चरण वंदन करता है,
वो कभी गरीब नहीं होता।

जो मां का चरण वंदन करता है,
वो कभी बदनसीब नही होता।

जो भाई का चरण वंदन करता है,
वो कभी गमगीन नही होता।

जो बहन का चरण वंदन करता है,
वो कभी चरित्रहीन नहीं होता।

जो गुरू का चरण वंदन करता है,
उस जैसा कोई खुशनसीब नहीं होता।

जो अपने से बड़ों का चरण वंदन करता है,
उसके पुण्य में बढ़ोतरी होती है।

जो भगवान का चरण वंदन करता है,
भगवान उसका साथ कभी नहीं छोड़ता।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️ 

Friday, 26 November 2021

मिक्की माउस




मिक्की माउस, 
मिक्की माउस 
कहाँ तुम्हारा हाउस, 
बोलो कहाँ तुम्हारा हाउस।

क्या खाते हो क्या पीते हो, 
बोलो कहाँ से आते हो, 
बिल्ली को तुम नाच नचाते, 
फिर कैसे छुप जाते हो। 
 
कार्टून की दुनिया से, 
एक दिन बाहर आओगे क्या,
लुक्का छुप्पी भागा दौड़ी,
मेरे संग भी खेलोगे क्या। 

मै भागूंगी तुमसे बेहतर, 
कभी पकड़ ना पाओगे,
दिन में तारे दिख जायेंगे, 
ऐसा चक्कर खाओगे। 

फिर तुमको जलपान कराकर, 
मै यह तुमसे पूछूँगी,
मिक्की माउस मिक्की माउस, 
कहाँ तुम्हारा हाउस,
बोलो कहाँ तुम्हारा हाउस।
 

रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

Thursday, 11 November 2021

हे मेरे ईश्वर 🙏


खूबसूरत है वो जिह्वा जो,
केवल ईश्वर के नाम की गुणगान करती है !!

खूबसूरत है वो हृदय जो,
केवल ईश्वर के लिये धड़कता है !!

खूबसूरत है वो भाव जो, ईश्वर की,
सोहबत की भावनाओं को समझ जाए !!

खूबसूरत है वो एहसास जिस मे,
ईश्वर प्रेम की मधुर मिठास हो जाए !!

खूबसूरत है वो बाते,
जिनमे ईश्वर की बाते शमिल हो !!

खूबसूरत है वो नैन जिनमे,
ईश्वर के दर्शन की प्यास है !!

खूबसूरत है वो हाथ जो,
नित ईश्वर की सेवा में लगे रहते है !!

खूबसूरत है वो सोच,
जिसमे केवल ईश्वर की ही सोच हो !!

खूबसूरत है वो पैर जो,
सुबह शाम ईश्वर की तरफ बढ़ते है !!

खूबसूरत है वो अश्रु जो,
ईश्वर की एक झलक पाने को बेताब है !!

खूबसुरत है वो कान जो,
ईश्वर नाम का सुमिरन सुनते है !!

खूबसुरत है वो शीश जो,
ईश्वर के चरणों में नमन को झुकता है !!

 

रचना - (अभय तिवारी) ✍️ 

माँ

हमने सभी रिश्तो में मिलावट देखा,  हमने कच्चे रंग का सजावट देखा। लेकिन सालों साल से देखा है मैंने माँ को, ना चेहरे पर कभी उसके थकावट को देखा,...