Monday, 4 October 2021

मै दासी प्रभु चरणन की


प्रभु तेरे चरणों की मै दासी,
अगणित रूप अनेक नाम है,
तू सर्वत्र निवासी।
प्रभु तेरे........

और भला क्या मुझको चाहे,
मै तेरी कृपा की प्यासी।
प्रभु तेरे........

नाही मुझे धन की अभिलाषा,
ना ही मै भोग अभिलाषी।
प्रभु तेरे........

क्यों मुझसे मुँह मोड़ के बैठा,
फेर दे नज़र जरा सी।
प्रभु तेरे........


रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

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