Thursday, 28 October 2021

आत्म ज्ञान की प्राप्ति

 


किसी शहर  में एक धनवान व्यापारी रहता था, उसके पास कोई धन और संपत्ति की कमी ना थी, बहुत बड़ी कोठी थी, नौकर भी थे, किसी तरह की कोई  कमी ना थी, लेकिन फिर भी वह हर समय परेशान रहता था।  उसकी यह परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी। ना दिन मे उसे चैन मिलता ना रात मे उसे सुकून मिलता। उसकी तबियत पहले से ज्यादा बिगड़नी शुरू हो गयी, क्या करे उसे कुछ सूझ भी नहीं रहा था एक दिन उसके किसी रिश्तेदार  उसके यहाँ मिलने आया और उससे उसकी परेशानी का कारण जानना चाहा, तब उस व्यापारी ने उसे पूरी बात बता दी।

उसके  शहर से कुछ दूर एक घने जंगल में  एक स्वामी जी अपने शिष्यों के साथ डेरा डाले हुए थे। ये बात उनके रिश्तेदार द्वारा उस व्यापारी को पता चली। उस रिश्तेदार ने उस व्यापारी से आग्रह किया कि वो उन स्वामी जी से   मिलकर अपनी समस्या का समाधान जाने। वो व्यापारी बिना विलंब किये अगले दिन स्वामी जी से मिलने पहुँचा स्वामी जी से मिलकर अपनी सारी समस्याएं बतायी और बोला प्रभु , मै अपने जिदंगी से परेशान हू मुझे दिन रात नींद नही आती, मै अवसाद ग्रस्त हो चुका हूँ और तनाव से घिरा महसूस कर रहा हूँ मुझे इस समस्या से निजात दिलाये।

स्वामी जी ने कहाघबराना नही है घबराने से बात बिगड़ती है। तुम्हारी सारी परेशानी दूर हो जायेगी। भगवान के चरणों में दीप जलाना शुरू कर दो। स्वामी जी ने उसे अंतर्मन से पुजा पाठ करने की सलाह दी, कुछ दिन पुजा पाठ करने के बाद उसका मन इससे भी हटने लगा वह जब भी पूजा करने बैठता उसका मन नही रमता और इधर उधर की बातें सोचने लगता। लगातार दिन बीतता चला गया। वो व्यापारी उस स्वामी जी से मिलने उनके पास पहुंचा और अपनी समस्या बताई, लेकिन स्वामी जी ने उसकी बाते सुनकर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और शांत रहे।

एक दिन की बात है वो व्यापारी  स्वामी जी के साथ बाते करते हुए घूम रहा था तभी अचानक उसके पैरो में एक बडे से पत्थर से ठोकर लगी और वहीं बैठ गया तथा पैरो को देखा और  पकड़कर चिल्लाने लगा - "स्वामीजी, मुझे कुछ उपाय बताये ? मुझे बहुत पीड़ा हो रही है।" तब स्वामी जी बोले - " रो क्यों रहे हो? छोटा सा पत्थर ही तो लगा है व्यापारी ने उस चोट को सहलाया और मरहम लगाया तब उसे उस पीड़ा से मुक्ति मिला।

स्वामी जी कुछ देर सोचने के बाद बोले नेहे मनुष्य तुम्हे जरा सी चोट क्या लग गयी तुम इतना गहरी वेदना में डूब गये, तुम्हें इतनी पीड़ा होने लगी की तुम बर्दाश्त नहीं कर  पाये। लेकिन जरा सोचो कि तुम अपने अंदर  कितने पत्थरों के चोट के निशान लेकर घूम रहे हो। लोभ के, मोह के, क्रोध के, ईर्ष्या के, द्वेष के, जलन के, अहंकार के। जब तक तुम उन पर मरहम लगाकर नही ठीक करोगे तब तक  तुम शांति की उम्मीद कैसे कर सकते हो ?"

स्वामी जी के इस दिव्य कथन को सुनने के बाद उसके अंदर ज्ञान की लौ प्रज्जवलित होने लगी, उसकी अंतरात्मा तृप्त हो उठी, उसके अदर ज्ञान का प्रकाश विधमान हो गया।अज्ञानता का अंधकार हमेशा के लिए दूर हो गया। उसे शांति का पथ प्रदर्शित होने लगा।

 

रचना - (अभय तिवारी) ✍️

Monday, 18 October 2021

कर्म और भाग्य


जिंदगी की वाटिका में,
कर्म और यह भाग्य ही तो,
खेलते हैं खेल हरदम।

है मनोबल तुझमे गर तो,
तू भी कुछ कर जाएगा,
कर्म से ही तो तू अपने,
आसमां को पायेगा,
किंतु तेरा भाग्य गर ना,
रास तुझको आयेगा,
तो ये तुझको खिंचकर,
वापस धरा पर लायेगा।

मनु नहीं मनुपुत्र है तू,
फिर उठेगा फिर चलेगा,
फिर गगन तक जाएगा,
तोड़ कर नभ से सितारे,
ले जमीं पर आयेगा,
इन सितारों की चमक से,
सज उठेगी फिर धरा,
स्वर्ग के सपनों से सुंदर,
स्वर्ग होगा फिर यहाँ।


रचना - (संगीता पाण्डेय) ✍️

Sunday, 10 October 2021

दिलासा


ये गम के जो बादल है कब तक रहेंगे,
कभी तो इन्हे भी मिटना पड़ेगा।
उगेगा सूरज जब मेरी किस्मत का,
ह्रदय में कही ना अँधेरा रहेगा।
ये सदियों से जो चक्र चलता रहा है, 
ये चलता रहेगा कभी ना रुकेगा। 
अभी इस घडी रात का है बसेरा, 
अगले ही छड़ दिन डालेगा डेरा।
दूरी तो है सिर्फ सोलह घडी की, 
फिर क्यों फिकर है मुझे जिंदगी की। 
ये गम और खुशी है दो पैर जिंदगी के,
इन्ही से जुड़े है हर छड़ जिंदगी के। 
जब गम बढे तो खुशी पीछे ठहरे, 
ख़ुशी जब बढे तो गम पे है पहरे। 
इसी क्रम से हमको भी जीना पड़ेगा, 
ये सब दर्द दुनिया का सहना पड़ेगा।
यही सोचकर मैंने खुद को संभाला, 
कभी दुख़ को भी दूर होना पड़ेगा। 
दुख इतना गहरा नहीं होता जिससे उभर ना पाये, 
आते हो अगर मोड़ जिंदगी में तो मुड़ जाए। 
मुश्किलें आती है तो बेशक आये, 
मगर आप अपना होश ना गवाए। 
देनी अगर दिल को सांत्वना, 
तो मेरी कविता दिलासा को अपनाये।


रचना - (संगीता पाण्डेय) ✍️

Wednesday, 6 October 2021

अनमोल बेटियाँ

 
घर जाने पर खुशी से दौड़ कर आये, 
वो है प्यारी बेटिया।
थके होने पर कोमल हाथो से सर दबाये,
वो है प्यारी बेटिया।
सबके चेहरे पर जो एक प्यारी सी मुस्कान दे जाए,
वो है प्यारी बेटिया।
हर बात को जो  सरलता से मान जाये,
वो है प्यारी बेटिया।
सारे घर को फूलो सा सजाये सवारें,
वो है प्यारी बेटिया।
हर गम और दुःख को जो भूल जाए, 
वो है प्यारी बेटिया।
दूर चले जाने पर सबको बहुत रुलाये, 
वो है प्यारी बेटिया।
पति की सेवा करके भी जो पिता को ना भुलाये,
वो है प्यारी बेटिया।
सबसे दूर होने के बाद भी जो सबके पास होने का एहसास कराये,
वो है प्यारी बेटिया।
सबके दिलों में अनमोल हीरे की तरह जो बस जाए,
वो है प्यारी बेटिया।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️

Monday, 4 October 2021

मै दासी प्रभु चरणन की


प्रभु तेरे चरणों की मै दासी,
अगणित रूप अनेक नाम है,
तू सर्वत्र निवासी।
प्रभु तेरे........

और भला क्या मुझको चाहे,
मै तेरी कृपा की प्यासी।
प्रभु तेरे........

नाही मुझे धन की अभिलाषा,
ना ही मै भोग अभिलाषी।
प्रभु तेरे........

क्यों मुझसे मुँह मोड़ के बैठा,
फेर दे नज़र जरा सी।
प्रभु तेरे........


रचना - (संगीता पाण्डेय ) ✍️

Sunday, 3 October 2021

मनोरम स्वप्न..

स्वप्न यही देखूं कि जग में, 
हर क्षण उत्सव होय।
सुखिया बने ये दुनिया सारी,
दुखिया रहे ना कोय।
बुद्धि, विद्या, तेज विवेक,
सबके मन में संचित हो,
धन और धान्य अपार सुखो से,
ना ही कोई वंचित हो।
ईश्वर की भक्ति हो मन में,
प्रेम रहे भरपूर,
राग द्वेष से चित्त सभी का,
रहे कोशों दूर।
स्मरण करे ईश्वर का तो,
मन उपवन सा खिल जाए,
वैष्णव जन बन सेवा-पथ पर,
फूलों जैसा बिछ जाए।
भक्ति करें ऐसी कि अपना 
जीवन सफल बना जाए।
कर्म करें ऐसा की मर के भी
अमरत्व को पा जाये।


रचना - (अभय तिवारी) ✍️

माँ

हमने सभी रिश्तो में मिलावट देखा,  हमने कच्चे रंग का सजावट देखा। लेकिन सालों साल से देखा है मैंने माँ को, ना चेहरे पर कभी उसके थकावट को देखा,...